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H.H. Pujya Swami Chidanand Saraswatiji | | Beautiful Visit by Pujya Swamiji and Pujya Swami Ramdevji
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Beautiful Visit by Pujya Swamiji and Pujya Swami Ramdevji

Jul 15 2019

Beautiful Visit by Pujya Swamiji and Pujya Swami Ramdevji

Pujya Swami Chidanand Saraswatiji and Pujya Yogrishi Swami Ramdevji visit and bless devotees listening to the beautiful Shrimad Bhagwat Katha by Pujya Swami Govind Dev Giriji Maharaj at the Vanprasth Ashram in Rishikesh recently.

Pujya Swamiji shared, “The Bhagawad Gita teachings and message are universal and timeless. The wisdom given by Bhagawan Shri Krishna on the battlefield to Shri Arjun is like a beacon of light to all of humanity for centuries to come of how to live a life of righteousness and dharma. It teaches us how to engage in the Yoga of Action, liberating us from the bondage of Karma. In this way engaging in Karma Yoga one acts with the intention of not what for me but rather what through me. How can I serve as an instrument of the Divine Grace working for the welfare and well being of all.”

Pujya Yogrishi Swami Ramdevji shared, “The Bhagawad Gita teaches us how to lead our lives from Swarth to Parmarth. The journey from darkness to light, from falsehood to truth, from death to immortality is the journey of Bhagawad Gita. It is the greatest text that gives us the message of freedom, devotion, action and peace.”

The saints offered a sacred Rudraksha sapling to Pujya Swami Govind Devji and inspired a mass pledge for tree plantation and for the protection of our environment.

#climateaction #treesforlife #faithinaction #bethechange #BhagawadGita #wisdom #spirituality #truth #light #GuruPurnima

वानप्रस्थ आश्रम में स्वामी गोविन्द देव गिरि जी महाराज के मुखाबिन्द से हो रही ’भगवत गीता’ की दिव्य कथा में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और स्वामी रामदेव जी महाराज ने किया सहभाग

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, पतजंलि योगपीठ के संस्थापक योगगुरू स्वामी रामदेव जी महाराज ने वानप्रस्थ आश्रम में स्वामी गोविन्द देव गिरि जी महाराज की दिव्य कथा में सहभाग किया। स्वामी गोविन्द देव जी महाराज ने आज की दिव्य कथा में ’भगवत गीता’ के व्यावहारिक स्वरूप की व्याख्या की।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और स्वामी रामदेव जी महाराज ने स्वामी गोविन्द देव जी महाराज को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया। तीनों पूज्य संतों ने रूद्राक्ष के पौधे हाथों में लेकर श्रद्धालुओं को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प कराया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि ’’भगवत गीता हमें पूजा पद्धति नहीं बल्कि जीवन पद्धति का ज्ञान कराती है। गीता का दर्शन हमें कर्म प्रधान जीवन जीने का संदेश देता है; गीता हमारे अंतस के प्रकाश को प्रकाशित करने वाला महान ग्रंथ है। वेद वाक्य, समोऽम सर्व भूतेषु अर्थात मैं सब में समान रूप से विराजमान हूँ तो हम क्यों भेदभाव करते है आईये हम संकल्प ले कि मानव-मानव एक समान सब के भीतर है भगवान अर्थात सब में ईश्वर है। आत्मवत् सर्व भूतेषु, अपनी तरह ही दूसरों को भी मानो जब यह भाव आ जायेगा तो हम न तो किसी को दुःख देंगे और न परेशान करेंगे न किसी का बुरा सोचेगे न किसी की बुराई करेगे अतः इन मंत्रों को अपने जीवन में लाये। हिन्दू धर्म का यह सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ ’’गीता’’ पूरे विश्व के लिये है, सार्वभौमिक, सार्वलौकिक है।’’

स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि ’’स्वार्थ से उपर उठकर परमार्थ की यात्रा कराती है भगवत गीता; अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाने और मृत्यु से अमरत्व की ओर ले जाने की यात्रा है भगवत गीता। मुक्ति, भक्ति, कर्म और शान्ति का संदेश देने वाला महान ग्रन्थ है गीता।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, स्वामी रामदेव जी महाराज और स्वामी गोविन्द देव जी महाराज ने सैकड़ों की संख्या मंे उपस्थित भक्तों और श्री ज्ञानेश्वर गुरूकुल के विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प कराया।

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